मैहर जिला के रामनगर ब्लॉक जनपद सदस्य राजेंद्र सिंह के द्वारा रेत माफिया के खिलाफ आवेदन लिखकर कलेक्टर से जांच की लगाई गुहार

*मैहर में रेत माफिया का तांडव! तिगड़ी पर ग्रामीणों का हल्लाबोल—कलेक्टर कार्यालय तक गूंजा गुस्सा*
*सोन घड़ियाल अभयारण्य में खुला खेल, 22 जेसीबी–150 डंपर का आरोप—प्रशासन पर मिलीभगत के गंभीर सवाल*
मैहर - जिले के कुबरी क्षेत्र से एक बार फिर ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जनपद सदस्य राजेंद्र सिंह (मुन्ना) के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कलेक्टर विदिशा मुखर्जी को शिकायती आवेदन सौंपते हुए रेत माफिया, पुलिस, राजस्व और वन विभाग की कथित तिगड़ी पर सीधा हमला बोला है।ग्रामीणों का आरोप साफ है
—संरक्षित सोन घड़ियाल अभयारण्य में बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतना बड़ा अवैध उत्खनन संभव ही नहीं। शिकायत में दावा किया गया है कि क्षेत्र में 22 जेसीबी, 50 ट्रैक्टर और करीब 150 डंपर दिन-रात रेत का दोहन कर रहे हैं। आरोप और भी सनसनीखेज हैं—माफिया इतने बेखौफ बताए जा रहे हैं कि उन्होंने नायब तहसीलदार को ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश की, जबकि पूर्व में एक पटवारी की हत्या भी रेत विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इलाके में दहशत और गुस्सा दोनों चरम पर हैं। शिकायत में रोजाना करीब 3 लाख रुपये की अवैध वसूली का आरोप लगाया गया है। साथ ही, महुआ जैसे सैकड़ों साल पुराने पेड़ों की कटाई और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।

 ग्रामीणों का कहना है कि अगर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला मुख्यालय का घेराव करेंगे। रासुका जैसी कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है। सवालों की बौछार अब सीधे सिस्टम पर है—अगर क्षेत्र प्रतिबंधित है तो मशीनों का यह साम्राज्य कैसे खड़ा हो गया? अगर अवैध है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर कार्रवाई हो रही है तो जमीन पर इसका असर क्यों नहीं दिख रहा?प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे आरोप और तेज हो गए हैं। अब बड़ा सवाल—क्या यह रेत साम्राज्य टूटेगा या फिर आरोपों के बीच ही सच दबा रहेगा?

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