मैहर जिला के रामनगर थाना क्षेत्र में नाबालिग के अपहरण एवं दुष्कर्म के मामले में शासकीय एडवोकेट पंकज कुमार पटेल के पैरबी से 20-20 वर्ष की कठोर कारावास एवं 5 5 हजार का जुर्माना पढ़े पूरी खबर

’नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में पांच दोषियों को 20-20 वर्ष का कठोर कारावास’
  अमरपाटन। विशेष न्यायाधीश अमरपाटन, जिला सतना श्री मानवेन्द्र पवार जी द्वारा विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 15/2023 एवं थाना रामनगर के अपराध क्रमांक 277/2023 धारा 363, 366ए, 376 (घ) (क), 370 (4), 120 बी भ0द0वि0 एवं पोस्को एक्ट की धारा 5/6 सहपठित धारा 16 से संबंधित गंभीर प्रकरण में पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक आरोपीगणों को 20 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 5-5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। न्यायालय ने आरोपियों को भारतीय दंड कानून की धारा 277/2023 धारा 363, 366ए, 376 (घ) (क), 370 (4), 120 बी भ0द0वि0 एवं   पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 सहपठित धारा 16 के तहत दोषी पाया। शासन की ओर से विशेष लोकअभियोजक पंकज कुमार पटेल ने पैरवी करते हुए शासन का पक्ष रखा।
         ’पानी भरने के लिए घर से निकली थी नाबालिग’
अभियोजन के अनुसार घटना 15 जून 2023 की सुबह करीब 5 बजे की है। नाबालिग पीड़िता पानी भरने के लिए अपने घर से बाहर निकली थी। इसी दौरान आरोपी राजू मेवाड़ा अपने एक साथी के साथ वहां पहुंचा और पीड़िता का मुंह दबाकर उसे मोटरसाइकिल से ले गया। इसके बाद उसे आरोपी भूरी बाई के घर ले जाया गया, जहां वह करीब दो दिन तक रही।
अभियोजन के मुताबिक बाद में राजू मेवाड़ा की पत्नी नीता रावत और भूरी बाई नाबालिग को ऑटो से मैहर लेकर पहुंचीं। यहां भूरी बाई को कथित तौर पर 20 हजार रुपये नकद और ऑटो का 2 हजार रुपये किराया देकर वापस भेज दिया गया।
’शादी के नाम पर नाबालिग को दूसरे आरोपियों के हवाले किया’
मामले के अनुसार मैहर में नाबालिग की मुलाकात आरोपी सुनील गौर और उसके भाई दिनेश उर्फ देवनारायण गौर से हुई। आरोप है कि शादी के नाम पर नाबालिग को भोपाल ले जाया गया, जहां सुनील गौर द्वारा उससे शादी की गई। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष आरोपियों द्वारा नाबालिग को कथित तौर पर पैसों के लेन-देन के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने तथा उसके साथ अपराध किए जाने के साक्ष्य प्रस्तुत किए।
अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने आरोपियों को दोषी पाया और सभी पांच दोषियों को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 5-5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
अभियोजन की प्रभावी पैरवी
इस गंभीर पॉक्सो प्रकरण में शासन की ओर से विशेष ’लोक अभियोजक पंकज कुमार पटेल ने प्रभावी पैरवी की’। न्यायालय के निर्णय के बाद नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले अपराधों में कानून की सख्ती और प्रभावी अभियोजन की भूमिका एक बार फिर सामने आई है।

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