*बंदूक के शौक ने छीनी कुर्सी, उपयंत्री सस्पेंड।*
_शासकीय निरीक्षण के दौरान लाइसेंसी बंदूक लेकर पहुंचे थे, सोशल मीडिया पोस्ट बनी कार्रवाई का आधार।_
सतना। सरकारी सेवा में अनुशासन और आचरण नियमों के पालन को लेकर सतना जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जनपद पंचायत मझगवां में पदस्थ उपयंत्री सतीश समेले को निलंबित कर दिया है। उपयंत्री द्वारा शासकीय कार्यों के निरीक्षण के दौरान अपनी निजी लाइसेंसी बंदूक साथ लेकर जाने तथा उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह कार्रवाई की गई। मामले को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए जिला कलेक्टर के निर्देश पर जांच कराई गई, जिसके आधार पर जिला पंचायत सीईओ ने निलंबन आदेश जारी कर विभागीय जांच भी प्रारंभ कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों पूर्व उपयंत्री सतीश समेले ग्रामीण क्षेत्र में शासकीय निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान उनके पास निजी लाइसेंसी बंदूक भी मौजूद थी। निरीक्षण के दौरान बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिनमें उपयंत्री फिल्मी अंदाज में बंदूक के साथ नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सरकारी अधिकारी के इस व्यवहार पर सवाल उठाए और मामला जिला प्रशासन तक पहुंच गया।
जिला कलेक्टर ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को जांच के निर्देश दिए। जांच के दौरान उपयंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। अपने लिखित जवाब में उपयंत्री ने स्वीकार किया कि वे शासकीय कार्य के दौरान लाइसेंसी बंदूक साथ लेकर गए थे। हालांकि, उन्होंने इसे सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक बताया, लेकिन उनका स्पष्टीकरण विभाग को संतोषजनक नहीं लगा।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शैलेन्द्र सिंह ने चार पृष्ठों का विस्तृत निलंबन आदेश जारी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया उपयंत्री पर शासकीय सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन, अनुशासनहीनता, वित्तीय अनियमितताओं तथा शासकीय कार्यों में बाधा उत्पन्न करने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन्हीं आधारों पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
निलंबन अवधि में उपयंत्री का मुख्यालय कार्यपालन यंत्री, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग, सतना निर्धारित किया गया है। साथ ही उन्हें वर्तमान सेक्टर के सभी शासकीय कार्यों और निर्माण संबंधी जिम्मेदारियों से अलग कर दिया गया है।
प्रशासन ने पूरे मामले की विभागीय जांच भी शुरू कर दी है। जांच अधिकारी को एक माह के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में वित्तीय अनियमितताओं सहित अन्य शिकायतों की भी पड़ताल की जाएगी। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो उपयंत्री के विरुद्ध आगे भी कड़ी विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
इस कार्रवाई को प्रशासनिक अनुशासन और सरकारी सेवा में आचरण नियमों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिला प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि शासकीय दायित्वों के निर्वहन के दौरान किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या नियमों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी।