**रीवा में ऐतिहासिक फैसला: शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करने वाले सरपंच को
**रीवा जिला | ग्राम पंचायत जरहा | जनपद पंचायत रायपुर कर्चुलियान**
रीवा जिले में पंचायत व्यवस्था से जुड़ा एक ऐतिहासिक निर्णय सामने आया है। शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर पद पर काबिज रहने वाले ग्राम पंचायत जरहा के सरपंच **मनीष सिंह उर्फ लाला** को **कलेक्टर प्रतिभा पाल** द्वारा सरपंच पद से *पृथक* कर दिया गया है। यह निर्णय **मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 36(1)(ग)(ग)** के तहत पारित किया गया है, जो अब तक जिले में अपनी तरह का पहला मामला है।
*क्या है पूरा मामला?*
**शिवेंद्र सिंह द्वारा दाखिल याचिका** में यह उल्लेख किया गया था कि मनीष सिंह, जो ग्राम पंचायत जरहा से निर्वाचित सरपंच हैं, उन्होंने अपने **नामांकन पत्र के साथ दिए गए शपथ पत्र में झूठी जानकारी प्रस्तुत की।** शपथ पत्र की धारा 8 में उन्होंने अपनी व अपने परिवार की संपत्ति का विवरण देते हुए खसरा नंबर **636** स्थित भवन को “स्वयं की संपत्ति” बताया, जबकि यह **शासकीय भूमि थी जिस पर उन्होंने अवैध रूप से अतिक्रमण कर रखा था।** इतना ही नहीं, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता **बृजेंद्र शुक्ला** ने यह भी तर्क प्रस्तुत किया कि सरपंच मनीष सिंह द्वारा **खसरा नंबर 637** पर भी शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किया गया है, जिसकी पुष्टि **तहसीलदार गुढ़** द्वारा की गई थी। जब तहसीलदार के आदेश को सरपंच ने **एसडीएम गुढ़** के समक्ष चुनौती दी, तो वहां भी आदेश को बरकरार रखा गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि सरपंच ने शासकीय भूमि पर कब्जा किया है।
*न्यायालय की सुनवाई और निर्णय*
प्रकरण में अनावेदक को कई अवसर दिए गए, परंतु निर्धारित तिथियों पर वह न तो न्यायालय में उपस्थित हुए और न ही कोई जवाब प्रस्तुत किया। इसलिए मामले की एकतरफा सुनवाई करते हुए, आवेदक के पक्ष में निर्णय पारित किया गया। **दिनांक 24 जून 2025** को पारित आदेश में **कलेक्टर एवं विहित प्राधिकारी प्रतिभा पाल** ने साफ तौर पर कहा कि मनीष सिंह अब पंचायत पदाधिकारी बने रहने के *पात्र नहीं हैं* और उन्हें सरपंच पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।
*आगे की प्रशासनिक कार्यवाही*
मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत रायपुर कर्चुलियान को आदेश दिया गया है कि वे तत्काल नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूर्ण करें और **सरपंच पद हेतु नए चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ करें।** साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करने वाला व्यक्ति ग्राम पंचायत की **वित्तीय शक्तियों का उपयोग नहीं कर सकता**, क्योंकि वह विधि-विरुद्ध होगा और उसकी वसूली भी की जा सकेगी।
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**यह मामला रीवा जिले में कानून और पारदर्शिता की दिशा में एक मिसाल बनकर सामने आया है**, जिसमें पहली बार किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के आधार पर पद से हटाया गया है
एडिटर इन चीफ रिपब्लिक न्यूज़ नेशन आवाज जनता की
