_*🏢🇮🇳📃बड़ा सवाल :-क्या सच मे IPS अधिकारी को बचाने मुख्यमंत्री के आदेश को चुनौती दे रहा पुलिस मुख्यालय ?*_
_
_भोपाल✒️मध्यप्रदेश की ब्यूरोक्रेसी और पुलिस महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब कटनी के पूर्व एसपी और 2014 बैच के IPS अधिकारी अभिजीत कुमार रंजन के खिलाफ विभागीय जांच को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र शर्मा ने सीधे मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर पुलिस मुख्यालय (PHQ) की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं।अ
धिवक्ता श्री शर्मा का दावा है कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रशासकीय अनुमोदन मिलने और गृह विभाग द्वारा निर्देश जारी होने के बावजूद,पुलिस मुख्यालय जानबूझकर इस जांच को लटका रहा है। आरोप है कि अधिकारी के रसूख और प्रभाव के कारण पीएचक्यू फाइल को कभी जबलपुर आईजी तो कभी एडीजी पीटीआरआई के बीच घुमा रहा है,लेकिन कोई भी अधिकारी स्पष्ट अभिमत देने को तैयार नहीं है।_
_शिकायत में स्पष्ट कहा गया है कि यह सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना और उन्हें चुनौती देने जैसा है। अधिवक्ता ने मांग की है कि IPS अभिजीत कुमार रंजन के विरुद्ध जांच अधिकारी तत्काल नियुक्त किए जाएं और इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ वरिष्ठ IAS अधिकारियों को भी शामिल किया जाए। अब देखना यह है कि भ्रष्टाचार पर "जीरो टॉलरेंस"का दावा करने वाली सरकार अपने ही आदेश की अनदेखी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या एक्शन लेती है।_